Karak in Hindi Grammar: हिंदी व्याकरण कारक की परिभाषा भेद एवं चिन्ह

karak in hindi grammar

Karak in Hindi Grammar : हिंदी व्याकरण में कारक (Case) का शाब्दिक अर्थ  "करने वाला" होता है। 

यह संज्ञा/सर्वनाम का क्रिया (कार्य) के बीच का सम्बन्ध को दर्शाता है।  Hindi Vyakaran में इसका काफी महत्वपूर्ण स्थान है। 

इस लेख में हम  "कारक किसे कहते है?" (What is Karak in Hindi Grammar?)
Kaarak Ke Bhed, Kaark Chinh, Karak Ki Paribhasha का विस्तृत अध्ययन करेंगे। 

What is Karak in Hindi Grammar (कारक किसे कहते है?)

किसी भी वाक्य में प्रयोग किये गए शब्दों का आपस में सम्बन्ध होता है। बिना संबध के ये वाक्य निरर्थक या गलत अर्थ देने लगते है। 

हिन्दी ग्रामर में इसी साथर्कता को लाने (संबध को बताने) के लिए Kaarak का प्रयोग किया जाता है। जैसे-

  • राम श्याम पुस्तक दी।  
  • राम "ने" श्याम  "को" पुस्तक दी। 
दूसरे वाक्य में "ने & को" Kaarak का प्रयोग किया गया है। Kaark का अर्थ यह है की वह शब्दों का वाक्य में संगत सम्बन्ध स्पस्ट करता है।

 कारक की परिभाषा (Karak ki Paribhasha in Hindi Grammar) :

संज्ञा (Noun) अथवा सर्वनाम (Pronoun) के  जिस रूप का सम्बन्ध वाक्य के अन्य शब्दों (विशेष रूप से क्रिया) के साथ होता है , कारक कहलाता है। 

जैसे- कृष्ण ने राक्षसों को अपने चक्र से मारा। 

इस वाक्य में कृष्ण, क्रिया (मारा) का कर्ता है। राक्षसों इस क्रिया का कर्म है। 

विभक्ति चिन्ह  :

कारक को सूचित (प्रकट) करने के लिए संज्ञा (Noun) या सर्वनाम (Pronoun) के साथ जो चिन्ह (प्रत्यय) लगाया जाता है , विभक्ति कहलाता है। 

कारक के भेद (Kaarak Ke Bhed) :

हिंदी व्याकरण (Hindi Grammar) में kaarak के 08 भेद (प्रकार) होते है। 

  1. कर्ता 
  2. कर्म 
  3. करण 
  4. सम्प्रदान 
  5. अपादान 
  6. सम्बन्ध 
  7. अधिकरण 
  8. सम्बोधन 

कारक के चिन्ह :

हिंदी व्याकरण में Kaarak की पहचान उनके विभक्ति चिन्हो द्वारा ही की जाती है। जो निम्न है -

कारक के भेद चिन्ह

इन्ही विभक्ति के मदद से हम वाक्य में किसी भी Kaark की पहचान करते है। 

कर्ता कारक (Karta Karak in Hindi Grammar):

संज्ञा (Noun) या सर्वनाम (Pronoun) का वह रूप जिससे क्रिया (कार्य) को करने का बोध हो ,Karta Kaarak कहलाता है। Karta Kaark का विभक्ति चिन्ह "ने" है। जैसे-

  • राम ने भोजन किया। 
  • रमेश गाना गा रहा है। 
  • सीता पुस्तक पढ़ती है। 
  • विनय ने पुस्तक पढ़ा। 

नोट- विभक्ति चिन्ह "ने" का प्रयोग कर्ता Kaark के साथ केवल भूतकालिक (Past) क्रिया होने पर होता है। 

वर्तमान काल (Present Tense), भविष्य काल (Future Tense) तथा क्रिया के अकर्मक होने पर "ने" विभक्ति चिन्ह का प्रयोग नहीं होता। 

कर्म कारक (Karm Kaarak):

वाक्य में संज्ञा/सर्वनाम पर जिस शब्द (क्रिया) का प्रभाव सीधे रूप से पड़ता है , उसे Karm Karak कहते है। इसका विभक्ति चिन्ह "को" है। 

  • महेश ने सुरेश को पैसे दिए। 
  • हंसा किताब पढ़ रही है। 
  • राम ने असुरो को मारा। 
  • बच्चा दूध पिता है। 

Karm Kaarak शब्द सजीव हो तो उसके साथ "को" विभक्ति चिन्ह का प्रयोग होता है। निर्जीव होने पर चिन्ह का प्रयोग नहीं होता। 

क्रिया के साथ "कौन" प्रश्न करके कर्ता की पहचान की जाती है। जबकि क्रिया के साथ "क्या & किसको" का प्रश्न करने पर कर्म का पता चलता है। 

 करण कारक (Karan Kaark) :

किसी वाक्य में कर्ता जिस साधन से क्रिया करता है या जिसके द्वारा  कोई क्रिया पूरी की जाती है ,उसे Karan Karak कहते है। इसका विभक्ति चिन्ह "से & के द्वारा" है। 

  • मै कलम से लिखता हूँ। 
  • किसान हल से खेत जोतता है। 
  • अध्यापक ने छात्र को डंडे से मारा। 

कुछ स्थानों पर से या द्वारा का का प्रयोग वाक्य में नहीं होता लेकिन अर्थ से या द्वारा के माध्यम से ही निकलता है। जैसे -

  • न आँखों देखा न कानो सुना। 

सम्प्रदान कारक (Sampradan Kaarak) :

हिंदी वर्णमाला में सम्प्रदान शब्द का अर्थ "देना" होता है। वाक्य में कर्ता जिसके लिए क्रिया करता है या जिसे कुछ देता है , उसे Sampradan Karak कहते है। 

इसका विभक्ति चिन्ह "को, के लिए, हेतु, निर्मित, वास्ते" है। जैसे-

  • शिवम ने गौरव को दवा दी। 
  • सुरेश अपने भाई के लिए उपहार लाया। 
  • परिवार को गिफ्ट लावो।

अपादान कारक (Apadan Kaark) :

वाक्य में जब किसी संज्ञा/सर्वनाम के किसी रूप से एक वस्तु/व्यक्ति का दूसरी वस्तु/व्यक्ति से अलगाव हो या उनकी तुलना करने का भाव उतपन्न हो,  उसे Apadan Karak कहते है। 

इसका विभक्ति चिन्ह भी "से " है किन्तु इससे वस्तु/व्यक्ति के पृथक या अलगाव का बोध होता है। 

  • पेड़ से पत्ता गिरा। 
  • ट्रेन स्टेशन से जा चुकी थी। 
  • राम श्याम से ज्यादा लम्बा है। 

करण और अपादान में अंतर :

करण और अपादान दोनों Kaarko में विभक्ति चिन्ह "से" का प्रयोग होता है। लेकिन दोनों में मूलभूत अंतर है। 

  • जिस साधन से अथवा जिसके द्वारा क्रिया (कार्य) पूरी की जाती है , उसे Karan Karak कहते है। 
  •  जिस संज्ञा/सर्वनाम से किसी वस्तु का अलग होना ज्ञात हो या दो वस्तु/व्यक्तियों की तुलना की जाये, उसे Apadan Karak कहते है। 

जैसे - राम ने श्याम को छड़ी से मारा।   (Karan Kaarak)

पेड़ से पत्ता गिरा।    (Apadan Kaarak)

सम्बन्ध कारक (Sambandh Kaarak):

जब वाक्य में किसी संज्ञा/सर्वनाम का अन्य किसी संज्ञा/सर्वनाम से सम्बन्ध हो, उसे Sambandh Karak कहते है। 

इसमें विभक्ति चिन्ह का,की,के,रा,री.रे,ना,नी,ने,में,भीतर,पर,पर का प्रयोग किया जाता है। जैसे-

  • मैंने अपनी पुस्तक लिखी। 
  • मेरी मोबाइल गिर गई। 

इसमें विषेशतः मेरा,मेरी,मेरे,अपना,अपनी,अपने,उनका,उनकी,उनके जैसे शब्दों का प्रयोग होता है। 

अधिकरण कारक (Adhikaran Kaarak):

संज्ञा के जिस रूप से क्रिया के आधार का बोध (जानकारी) हो उसे Adhikaran Karak कहते है। 

इसमें विभक्ति चिन्ह "में,पै, पर,भीतर,ऊपर" का प्रयोग होता है। 

  • टेबल पर ग्लास रखा है। 
  • मै 12 मिनट में आ रहा हूँ। 

सम्बोधन कारक (Sambodhan Karak in Hindi Grammar):

जिस शब्द से किसी को पुकारने/सम्बोधन का बोध हो उसे Sambodhan Kaarak कहते हैं। 

इसमें विभक्ति चिन्ह "हे!, हो! ,अजी! , अरे! , ए! , रे" का प्रयोग होता है। 

  • हे प्रभु! मुझपर कृपा करे। 
  • विभु! उधर मत जाना। 
उपरोक्त लेख में हमने "Karak ki Paribhasha in Hindi Grammar", Kaarak ke Bhed, Kaark Chinh का विस्तृत अध्ययन किया। जिससे आपको हिंदी व्याकरण (Hindi Grammar) को समझने में काफी आसानी होगी। 
Kaarak से जुड़े किसी भी प्रश्न,सुझाव या विचार हमसे जरूर साझा करे।

0/Post a Comment/Comments

और नया पुराने